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Archive for the ‘Blog’ Category

अलविदा लाेमियाें, अब चर्च के रूढ़िवाद पर प्रहार कौन करेगा?

अलविदा लाेमियाें, अब चर्च के रूढ़िवाद पर प्रहार कौन करेगा? मशहूर लेखक, आलोचक और पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट के वरिष्ठ सहयाेगी पी बी लाेमियाें  का झांसी के रेलवे असपताल में निधन हो गया। उन्होंने गुरूवार रात 9-15 बजे अंतिम सांसें ली। पिछले कुछ दिनों से वो बीमार […]

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आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी दूर करनी होगी!

भारतीय संविधान की आत्मा है बराबरी और इंसाफ़. आंबेडकर ने इस संविधान के बनने के बहुत पहले कहा था कि विधायिका जनता का प्रतिनिधित्व करती है, न कि मात्र बुद्धिजीवियों का. उनका आशय पढ़े-लखे लोगों को ही प्रतिनिधित्व का अधिकार देने से था. भारतीय संविधान जनता को […]

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किराए की कोख पर रोक के पक्ष में केंद्र

सरोगेसी से पैदा बच्चे की नागरिकता पेचीदा मामला है। इसलिए आठ यूरोपीय देशों- जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, चेक गणराज्य, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम और स्पेन- ने भारत सरकार को लिखा था कि वह अपने डॉक्टरों को निर्देश दे कि अगर कोई दंपति सरोगेसी के जरिए औलाद पाने का रास्ता […]

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भारत-अफ्रीकी रिश्ता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं

अफ्रीका प्राकृतिक संसाधनों के मामले में बेहद समृद्ध है, तो भारत के पास आईटी जैसे क्षेत्र में कौशल हासिल है। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पक्षों की चिंताओं में भी बहुत कुछ साझा है, फिर वह कुपोषण से मुक्ति हो या फिर इबोला, मलेरिया और […]

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असहिष्णु नहीं है भारत

आप विरोध करिए – सर्मथन करिए, यह भारत में ही संभव है, पाकिस्तान या बांग्लादेश में नहीं। यही भारत की विशेषता है, जो इसे दूसरों से अलग करती है। हम जिस संस्कृति के धारक हैं, उसमें सर्वधर्म समभाव है। वह प्राणिमात्र के कल्याण की प्रार्थना करती है। […]

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सेकुलर जमात के निशाने पर – संघ

देश में फिर एक बार ऐसी स्थिति बनाई जा रही है, मानो सांप्रदायिकता में समाज उबल रहा है, और कुछ सेक्युलर देवदूत उसको बचाने के लिए अपनी बलि चढ़ाने तक को तैयार हैं। क्या वाकई ऐसी स्थिति है? इस माहौल से परे जरा अपने आसपास नजर दौड़ाइए। […]

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स्वच्छता के प्रति जागरूक हुआ देश

एक साल पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत का अभियान छेड़ा था। उनकी इस मुहिम को देश के हर वर्ग का काफी सर्मथन मिला है। इस एक साल में देश में साफ सफाई को लेकर जनता में जागरूकता फैली […]

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आरक्षण नीति की समीक्षा में बुराई क्या है?

समीक्षा का अर्थ आरक्षण व्यवस्था की समाप्ति की सोच ही क्यों निकाल लिया जाता है? समीक्षा के आधार पर आरक्षण नीति को अधिक कारगर और व्यावहारिक भी तो बनाया जा सकता है। हैरत की बात है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण खत्म करने की बात […]

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सुरक्षा परिषद में सुधार एक जटिल प्रक्रिया

इसमें कोई दो राय नहीं कि सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता की भारत की दावेदारी मजबूत है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि वीटो पावर रखने वाले बड़े चौधरी देश क्या भारत को अपनी कतार में देखना चाहेंगे? अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन अपनी वीटो […]

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सच सामने आएगा

पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे इतिहास को समझने में मदद मिलती है। यह स्वाभाविक है कि हम अपने राष्ट्रीय नायकों का सम्मान करें। देश की जनता नेता जी की मौत के रहस्य से पर्दा उठवाना चाहती है। लेकिन, सरकारों का […]

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