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Archive for the ‘Blog’ Category

श्रीलंका से दोस्ती

श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इंडिया फाउडेशन द्वारा दिल्ली में आयोजित एक सम्मेंलन में भारत को आश्वस्त किया है कि उनके देश के सभी दल भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित सम्मेंलन में विक्रमसिंघे ने कहा कि दोनों देशों के […]

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अक्षम्य लापरवाही – अपराधी कौन है?

आखिर इस हादसे के लिए दोषी कौन है? इसका उत्तर देना आसान नहीं है। सामान्य उत्तर यह दिया जा रहा है कि यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लापरवाही की दुष्परिणति है। आखिर प्रशासन ने वहां जिलेटिन डिटोनेटर रखने की अनुमति क्यों दी? यह प्रश्न अपनी जगह हैं। ये […]

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हिंदी बोलने में शर्म क्यों ?

स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है। हिंदी बोलने में ही लोगों को शर्म महसूस होती है। लोग टूटी-फूटी, ऊटपटाँग अंग्रेज़ी बोल कर भी गर्व महसूस […]

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आईएस के खिलाफ भारतीय मुसलमानों की बुलंद आवाज !

आईएस के खिलाफ फतवा जारी कर भारतीय मुसलमानों ने दुनिया में यह संदेश दिया है कि वे आतंकवाद के खिलाफ हैं। यह फतवा दुनिया के लिए हिंदुस्तान का एक पैगाम भी है, जो बताता है कि यहां इस्लाम को सच्चे रूप में स्वीकार किया जाता है। दहशतगर्द […]

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‘ओआरओपी’ पर राजनीति न की जाए!

इस फैसले में राजनीतिक स्तर पर जो मीन-मेख निकाली जा रही है, वह विरोध के लिए विरोध की प्रवृत्ति का परिचायक है। कम से कम कांग्रेस के पास को इस फैसले की आलोचना करने का नैतिक आधार बिल्कुल नहीं है। यह बात रिकॉर्ड पर है कि यूपीए […]

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संघ-मोदी पर अंग्रेजी मीडिया का हल्ला !

आज आरएसएस भारत का एकलौता वैचारिक पुंज है। इसके आगे एक भी कोई दूसरा नहीं है जो विचार के बूते अपने को जनता में पैठा ले या जनता की नब्ज पर हाथ रखते हुए अपने को स्वीकार्य बनवा सके।  लिहाजा संघ से संवाद में क्या गलत है? […]

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आरक्षण की सियासत – राजनैतिक पार्टियों को नया सोचना होगा

यह एक अजीब स्थिति है कि पिछड़ों, दलितों और आदिम जातियों को दिए जाने वाले आरक्षण के खिलाफ गुजरात में कई बार आंदोलन कर चुका पटेल समुदाय अब खुद आरक्षण की मांग कर रहा है। यह स्थिति आरक्षण के राजनीतिक इस्तेमाल के खतरों को भी दिखाती है, […]

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संयुक्त अरब अमीरात और भारत के संबंधों को नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा भारत की विदेश नीति में एक तरह के भूल सुधार जैसी है। पिछले 34 वर्षों में भारत के किसी राष्ट्राध्यक्ष ने इस तरफ मुड़कर देखने की जरूरत नहीं महसूस की। इस तथ्य के बावजूद कि चीन और अमेरिका […]

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धर्मातरण समाजार्थिक समस्या का हल नहीं

धर्मातरण किसी भी समाजार्थिक समस्या का हल नहीं है। उस समय तो बिल्कुल भी नहीं जब हर धर्म के भीतर मनुष्य विरोधी, अवैज्ञानिक और असंवेदनशील प्रवृत्तियां नए-नए रूपों में सक्रिय हो रही हों, सहज मानवीय जीवन को असामान्य तौर पर जटिल बना रही हों और अन्याय-अत्याचार के […]

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चर्च और वेटिकन के विरुद्व संयुक्त राष्ट्र में दस्तक

दलित ईसाइयों ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून को दिए ज्ञापन में मांग की कि वह चर्च को अपने ढांचे में जातिवाद के नाम पर उनका उत्पीड़न करने से रोके और अगर चर्च ऐसा नही करता तो संयुक्त राष्ट्र में वेटिकन को मिले स्थाई अबर्जवर […]

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