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सच सामने आएगा

पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे इतिहास को समझने में मदद मिलती है। यह स्वाभाविक है कि हम अपने राष्ट्रीय नायकों का सम्मान करें। देश की जनता नेता जी की मौत के रहस्य से पर्दा उठवाना चाहती है। लेकिन, सरकारों का मौन इस भावना को निराश करता है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस से संबंधित जिन 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया है, उनकी विस्तृत पड़ताल में तो वक्त लगेगा, लेकिन यह एक बड़ा कदम है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हवाई दुर्घटना में मौत एक रहस्य बनी हुई है, जिसकी बड़ी वजह यही है कि सरकार के पास इससे संबंधित जो दस्तावेज हैं, वे कभी सार्वजनिक नहीं किए गए। बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने जो फाइलें सार्वजनिक की हैं, उनसे यह लगता है कि अंग्रेज और अमेरिकी गुप्तचर विभागों को भी यह शक था कि नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में नहीं हुई है, हालांकि इस प्रसंग से पूरा परदा शायद तभी उठे, जब केंद्र सरकार के पास जो फाइलें हैं, वे सार्वजनिक हों।

पश्चिम बंगाल सरकार के पास जो फाइलें हैं, वे सन 1937 से 1947 के बीच की हैं, यानी आजादी के बाद नेताजी से संबंधित दस्तावेज केंद्र सरकार के पास हैं। उनमें ऐसे दस्तावेज भी हो सकते हैं, जो निश्चित रूप से बता सकें कि क्या नेताजी की हवाई दुर्घटना में मौत हुई थी या नहीं।

बार-बार यह बात उठती है कि नेता जी की मौत विमान दुर्घटना में हुई अथवा यह कहानी ही झूठी थी? क्या नेता जी स्वतंत्रता के बाद काफी समय तक जीवित रहे? इस रहस्य को छोड़ भी दिया जाए, तो इतने पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे इतिहास को समझने में मदद मिलती है। यह स्वाभाविक है कि हम अपने राष्ट्रीय नायकों का सम्मान करें। देश की जनता नेता जी की मौत के रहस्य से पर्दा उठवाना चाहती है। लेकिन, सरकारों का मौन इस भावना को निराश करता है।

हालांकि, केन्द्र सरकार ने तीन आयोग बनाये।  तीनों ही आयोगों की रिपोर्ट अलग-अलग हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लिया गया फैसला स्वागत योग्य है। कम से कम सरकार ने अपने स्तर से रहस्य का पर्दा हटाने की कुछ तो कोशिश की है। फाइलें मिलने के बाद नेता जी के परिजनों ने इन्हें प्राप्त करके पुलिस संग्रहालय में ही रखने के लिए दे दिया है। इन फाइलों में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन, 18 अगस्त 1945 को जापान में हुई कथित विमान दुर्घटना में उनके मारे जाने की कथित कहानी एवं आम धारणा के अनुसार उनके विमान दुर्घटना में बच जाने के बाद अज्ञातवास से जुड़े विवरण होने की संभावना है। फाइलों से पता चला है कि नेता जी के गायब होने या उनकी मृत्यु की कथित कहानी के बाद परिजनों की जासूसी कराई गई।

यहां प्रश्न यह उठता है कि जब केंद्र सरकार ने यह मान लिया था कि नेता जी की जापान में विमान दुर्घटना में मौत हो गई है तो फिर उनके परिवार की जासूसी क्यों कराई गई? फाइलों से पता चला है कि नेता जी के भतीजे और अन्य परिजनों की जासूसी के लिए 14 कर्मचारी तैनात थे। हैरानी की बात यह है कि जस्टिस बनर्जी कमीशन द्वारा नेताजी की विमान दुर्घटना में मौत को खारिज करने के निष्कर्षों को मनमोहन सरकार ने बिना किसी आधार के खारिज कर दिया। ममता बनर्जी सरकार द्वारा दस्तावेजों को सार्वजनिक किए जाने के बाद अब केंद्र सरकार से भी अपेक्षा होगी कि वे शेष फाइलों को जारी करे। इतिहासकारों के लिए यह दस्तावेज भले ही नई सामग्री हो, लेकिन संभव है कि इंदिरा-राजीव डाक टिकटों की बेमतलब की बहस नेताजी की फाइलों से नेहरू तक जा पहुंचेगी। फाइलों के अध्ययन से कुछ और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। किंतु इस रहस्य पर से पूरी तरह पर्दा तभी उठ सकता है, जब केंद्र सरकार, गृह मंत्रलय के अधीन नेता जी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करे।

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