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वेटिकन कंधमाल हिंसा में मारे गए ईसाइयाें काे शहीद घोषित करेगा?

चर्च की यह दलील गले उतरने वाली नहीं है कि केवल मसीह में विश्वास करने के कारण या ईसाइ हाेने के कारण वे मार दिए गए। कंधमाल हिंसा के कई कारण थे जिनमें दाे बड़ी वजह धर्मांतरण आैर आरक्षण थी। यह बात कई जांच एजेंसियाें ने भी मानी है। एक सदस्यीय पैनल का नेतृत्व करने वाले न्यायाधीश एस सी मोहपात्रा ने कंधमाल में हिंसा की अंतरिम रिपोर्ट में कहा था , मुख्य वजह भूमि विवाद, धर्म परिवर्तन और पुन: धर्म परिवर्तन एवं फर्जी सर्टिफिकट हैं।

2008 में कंधमाल हिंसा में मारे गए ईसाइयाें काे शहीद घोषित करने की मांग काे लेकर कैथाैलिक चर्च आैर कैथाैलिक यूनीयन ने वेटिकन पर अपना दबाब बड़ा दिया है। 25 अगस्त को कंधमाल हिंसा की 10वीं सालगिरह के अवसर पर पोप फ्रांसिस काे लिखे पत्र में मांग की गई है कि वेटिकन जल्द से जल्द उन्हें शहीद घोषित करें। यह पत्र भारत में पाेप के राजदूत महाधर्माध्यक्ष गियामब्लास्ता डायक्वाट्रो (Archbishop Giambattista Diquattro)  के माध्यम से भेजा गया है। हालांकि कटक भुवनेश्वर आर्चडायसिस के आर्चबिशप के साथ चार कार्डिनल्स ने इस प्रक्रिया पर पहले ही अपना काम शुरू कर दिया था।

इसी साल कटक-भुवनेश्वर आर्चडायसिस के आर्कबिशप जॉन बारवा ने इनके लिए अंग्रेजी और ओड़िया भाषा में प्रार्थना तैयार करवाई है। कंधमाल हिंसा में लगभग 100 लाेग मारे गए थे। कैथाेैलिक चर्च  के मुताबिक कंधमाल की हिंसा में मरे लोग साहसी थे और येसु मसीह में विश्वास करने के लिए मरने को भी तैयार थे। अंत में मौत के स्वीकार कर उन्होंने अपने विश्वास की गवाही दी। इसलिए शहीद घोषित किये जाएं।

चर्च की यह दलील गले उतरने वाली नहीं है कि केवल येसु मसीह में विश्वास करने के कारण या ईसाइ हाेने के कारण वे मार दिए गए। कंधमाल हिंसा के कई कारण थे जिनमें दाे बड़ी वजह धर्मांतरण आैर आरक्षण थी। यह बात कई जांच एजेंसियाें ने भी मानी है। एक सदस्यीय पैनल का नेतृत्व करने वाले न्यायाधीश एस सी मोहपात्रा ने कंधमाल में हिंसा की अंतरिम रिपोर्ट में कहा था , मुख्य वजह भूमि विवाद, धर्म परिवर्तन और पुन: धर्म परिवर्तन एवं फर्जी सर्टिफिकट हैं। आदिवासियों को संदेह था कि ईसाई फर्जी तरीके से उनके जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। 

भूमि, धर्म परिवर्तन के मुद्दों के अलावा फर्जी सर्टिफकट भी एक बड़ा कारण था जिसने कंधा आदिवासियों के बीच कलह पैदा किया। कंधमाल की कुल जनसंख्या में में कंधा आदिवासियां की जनसंख्या 52 फीसदी है। हिंसा में दाेनाे ही तरफ के लाेगाें काे जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है आैर हिदुआें के साथ – साथ ईसाई भी हिंसा के अराेपाें का आदलत में सामना कर रहे है, आदलत की तरफ से दाेषी करार देने के कारण कई ईसाई आजीवन जेल की सजा काट रहे हैं।

कंधमाल में हिंसा के कारण दोनों समुदायों में जो शत्रुता का भाव बन गया था वह धीरे-धीरे खत्म हाे रहा था लेकिन कैथाेैलिक चर्च के इस कदम ने उसे स्थायी बना दिया है। जब आम ईसाई राेजाना अपने घर आैर हर इतिवार काे चर्च द्वारा बनाई गई  प्रार्थना का जाप करेगा ताे उससे अंदर स्थायी शत्रुता का भाव सदैव बना रहेगा। कैथाेैलिक चर्च के इस कदम से हमारा देश भारत उन देशाें में शामिल हाे गया है जहां सदियाे पहले मसीह में विश्वास करने के लिए विश्वासियों का उत्पीड़न किया जाता था या उन्हें मार दिया जाता था।

भारत दक्षिण एशिया का वह पहला देश बन गया है। कैथाेैलिक चर्च  ने एक कदम आेर आगे बढ़ते हुए इन शहीदों काे संत की श्रेणी में लाने के लिए फादर पुरुषोत्तम नायक को प्रक्रिया के लिए दस्तावेज तैयार करने का कार्य सौंपा है। फादर नायक आर्च-बिशप के सचिव और ओडिशा काथलिक चर्च के उप-सचिव हैं।

अपने लाभ के लिए चर्च  भारत काे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर रहा है जबकि हकीकत यह है कि भारत में चर्च को जितनी सुविधाएं प्राप्त है, उतनी तो उन्हें यूरोप तथा अमेरिका में भी नहीं मिलतीं। विशेष अधिकार से शिक्षण संस्थान चलाने, सरकार से अनुदान पाने आैर ईसाइयत के प्रचार- प्रसार की पूरी आजादी हासिल है

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