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चर्च में नन आैर ईसाई समाज

चर्च नेता केरल की कम्युनिस्ट सरकार की मदद से बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रेंको मुलक्कल  काे बचाने का काम कर रहे है। देश के लिए  यह कितने शर्म की बात है, कि एक अबला 78 दिन से इन्साफ मांग रही है। उसे इन्साफ देना तो दूर की बात, उसे जलील किया जा रहा है। चर्च नेतृत्व जिस तरह पीड़ित नन का चरित्र हनन करने की काेशिश कर रहा है उसकी इजाजत काेई सभ्य समाज नहीं देता।
पिछले कुछ दिनों से अनैतिक कार्य को लेकर कैथोलिक चर्च चर्चा में है। केरल के कोट्टायम में चर्च में जाने वाली एक महिला ने पांच पादरियों पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। केरल में एक नन ने चर्च के बिशप के खिलाफ बलात्कार करने का मामला दर्ज कराया है। नन का कहना है कि बिशप ने कई बार उसका यौन शोषण किया। आरोपी बिशप  फ्रेंको मुलक्कल कैथोलिक डायोसीस (जालंधर-पंजाब) का मुखिया है, जिन्हें कुछ साल पहले ही वेटिकन ने पंजाब के कैथोलिक चर्च की जिम्मेदारी सौंपी है।

रांची के मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ से बच्चों की बिक्री का मामला शर्मनाक है। कैथाेलिक चर्च की मदद से मदर टेरेसा ने जिन संस्थाओं को मानवता की सेवा के लिए खड़ा किया था उनमें बच्चों की खरीद-फरोख्त हाेना यह तो ईसा-भक्ति नहीं, ईश-द्रोह है। बच्चों की बिक्री का मामला अब देशव्यापी मानव तस्करी का पर्दाफाश कर रहा है।

निराशाजनक यह है कि ईसाई समाज में इस पर कोई चर्चा नही है। आत्ममंथन करने की जगह ईसाई नेता चर्च काे बचाने आैर उनके तथाकथित काले कारनामाें पर पर्दा डालने और घटनाओं काे नज़रअंदाज़ करने में लगे हुए हैं। मुझे हैरानी हुई कि रांची के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के समर्थन में 15 जुलाई को भारी बारिश के बावजूद, अलग-अलग कलीसियाओं के हजाराें लाेगाें ने जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे मानव श्रृंखला बनाई आैर गुमला, सिमडेगा, बोकारो, जमशेदपुर और खूंटी में  विरोध प्रदर्शन किये।

रेप के आरोपी बिशप का मिशनरीज ऑफ जीसस संस्‍था ने बचाव किया। कोच्चि में प्रदर्शन कर रही ननों को प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की चेतवनी दी। मिशनरीज ऑफ जीसस ने कहा कि बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। हम कोच्चि में हो रहे प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करते हैं। इस तरह के आरोपों के चलते हम एक पवित्र आत्‍मा को सूली पर नहीं चढ़ा सकते। पीड़ित नन भी इसी संस्‍था से जुड़ी हुई हैं।

अब नन काे एहसास हाे गया है कि उसे यहां इंसाफ नही मिल सकता इसलिए उसने अपनी यह शिकायत पोप को भेजी है, साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि चर्च नेता केरल की कम्युनिस्ट सरकार की मदद से बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रांको मुल्क्क्ल काे बचाने का काम कर रहे है। देश के लिए यह कितने शर्म की बात है, कि एक अबला 78 दिन से इन्साफ मांग रही है। उसे इन्साफ देना तो दूर की बात, उसे जलील किया जा रहा है। चर्च नेतृत्व जिस तरह पीड़ित नन का चरित्र हनन करने की काेशिश कर रहा है उसकी इजाजत काेई सभ्य समाज नहीं देता।

अगर कम्युनिस्ट सरकार की मदद न होती तो बलात्कार के आरोपी बिशप अगस्त के पहले हफ्ते में ही गिरफ्तार हो जाता। केरल पुलिस फ्रांको मुल्क्क्ल के खिलाफ बाकायदा हाईकोर्ट में आठ पेज का हल्फिया बयान दे चुकी है। 13 अगस्त को दाखिल इस हल्फिया बयान में कहा गया है कि शुरुआती जांच के मुताबिक़ बिशप फ्रांको ने नन से कई बार बलात्कार किया। केरल की पुलिस ने केरल के अलावा दिल्ली, उज्जेन और जालन्धर में बारीकी से जांच कर सबूत जुटाए थे। इस हल्फिया बयान में उस सेंट फ्रांसिस मिशन होम के कमरा नंबर 20 का भी जिक्र है, जिस में बलात्कार किया गया था।

वैसे तो कोर्ट में हल्फिया बयान से पहले ही बिशप को हिरासत में लिया जाना चाहिए था। पर हल्फिया बयान के बाद भी हिरासत में ले कर पूछताछ नहीं की गई। क्या किसी सामान्य नागरिक पर बलात्कार का आरोप लगने पर पुलिस इस तरह की नरमी बरतती है। अब जब कि देश भर में शोर मच गया है और ननों ने पोप को चिठ्ठी लिख दी है, तब भी पुलिस ने बिशप को 19 सितम्बर को पूछताछ के लिए बुलाया है। नन की ओर से 164 के अंतर्गत दर्ज बयान में यहाँ तक कहा गया है कि बिशप ने कई बार जब उस के साथ जबरदस्ती की तो उस के साथ आप्राकृतिक यौन शोषण भी किया।

कोट्टयम के जिला पुलिस प्रमुख के सामने 10 जुलाई को बाकायदा बिशप का लुकआउट नोटिस जारी करने की याचिका भी रखी गई थी। जांच अधिकारी ने यह लुकआउट याचिका इस लिए लगाई थी ताकि बिशप देश छोड़ कर भाग न सके। पर कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने न लुकआउट नोटिस जारी होने दिया , न हल्फिया बयान के बावजूद गिरफ्तारी होने दी। कम्युनिस्ट नेतृत्व इस मामले में खामोश है। हर मामले में अपनी राय रखने वाले सीतराम येचुरी भी कुछ बाेलने काे तैयार नहीं है।

बिशप फ्रेंको मुलक्कल के मामले में कुछ बुद्धिजीवी ईसाइयों ने भारत स्थित वेटिकन के राजदूत के माध्यम से पाेप फ्रांसिस से मांग कि है कि वह जांच पूरी हाेने तक बिशप काे चर्च के कामों से निलंबित करें ताकि निष्पक्ष जांच हाे आैर पीड़ित काे न्याय मिल सके। हालांकि चर्च नेता अपने खिलाफ आए किसी फैसले काे नहीं मानते, चर्च का यह बहुत पुराना हथकंडा है कि वह अपने ऊपर आरोप लगाने या न्याय की बात करने वाले काे ही ऐसे ही झूठे ममलाें में फंसाकर कटघरे में खड़ा करता आया है। इस काम में सरकार और प्रशासन भी उनकी मदद में लगे हाेते है।

आज जब पूरी दुनिया में चर्च के अनुयायी उसके एकाधिकार काे चुनाैती दे रहे है। यूराेप के चर्च में ताजी हवा के झाेंके आने की उम्मीद बन रही है। वहीं भारत में कोई सुगबुगाहट नहीं है, यहाँ कलर्जी (Clergy) मस्त – अनुयायी पस्त और नन तस्त्र है। आम ईसाइयों को चाहिए कि वह उन लाेगाें का साथ दें, जाे चर्च ढांचे में शोषित -उत्पीड़ित किए जा रहे हैं। भारतीय ईसाइयों के लिए यह दुखद है कि सैकड़ों सालों से देश के अंदर चर्च में काेई सुधारवादी आंदोलन खड़ा नहीं हो सका।

चर्च के साम्राज्यवादी दृष्टिकोण के कारण ऐसे किसी आंदाेलन काे पनपने ही नही दिया गया। इस कारण उनके बीच काेई सुधारवादी धारा आज तक बही ही नहीं।

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