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चुनाव तंत्र को कटघरे में खड़ा करने का षड्यंत्र

भारतीय लोकतंत्र की समूचे विश्व में प्रतिष्ठा है, सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव कराने के चलते चुनाव आयोग की साख है, ऐसे में वे कौन लोग हैं जो भारत की साख को ही खत्म करने पर उतारू हैं? ऐसा क्यों हो रहा है कि बार-बार हार से हताश कांग्रेस देश की प्रतिष्ठा को ही दांव पर लगा रही है? देश में दो दशकों से ईवीएम से चुनाव हो रहे हैं। 10 साल यूपीए की सरकार रही, मायावती, अखिलेश की सरकार बनी, ममता की दो-दो बार सरकार बनी, 2014 में कांग्रेस ने ही लोकसभा चुनाव करवाए थे, फिर ईवीएम हैक कैसे हो गया?
saiyed-sujaएक भारतीय साइबर विशेषज्ञ सैयद सुजा ने अमेरिका में राजनीतिक शरण की मांग करते हुए दावा किया कि भारत में 2014 के आम चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के माध्यम से धांधली हुई थी। उसने कहा कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। सैयद सुजा ने हैकिंग का दावा उस समय किया गया है, जब कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने मतदान के लिए ईवीएम मशीनों का विरोध करने वालों को बड़ा झटका देते हुए आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए बैलेट पेपर यानी मतपत्रों के जरिये मतदान कराने की याचिका खारिज कर दी थी।
भारतीय चुनावों में प्रयुक्त ईवीएम को लेकर बार-बार सवाल उठाना अपने ही चुनाव तंत्र को कटघरे में खड़ा करने जैसा है। कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां बार-बार यह धत्कर्म कर रही हैं। अब तक कांग्रेस देश के अंदर ईवीएम को लेकर सवाल उठाती रही है, लेकिन अब वह विदेश में भी यह काम करने लगी है। लंदन में आयोजित ईवीएम हैकेथॉन में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का मौजूद रहना यह संदेह करने के लिए पर्याप्त है कि इसके पीछे कौन है। यह भी असंभव है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सहमति के बिना कपिल सिब्बल लंदन गए होंगे। इसलिए यह जानबूझ कर भारतीय चुनाव प्रणाली को बदनाम करने की साजिश लगती है।
चूंकि काफी विमर्श और परीक्षण के बाद सरकार ने चुनाव के लिए ईवीएम को अपनाया था और समय के साथ इसे तकनीकी रूप से और सुरक्षित किया गया है और अब वीवीपैट का इस्तेमाल शुरू हो गया है, साथ ही चुनाव आयोग अनेक बार ईवीएम को हैक करने की खुली चुनौती दी, लेकिन आरोप लगाने वाले विपक्षी दल के एक भी नेता उस चुनौती का सामना करने नहीं पहुंचे, इसके बावजूद विपक्षी दलों का ईवीएम पर संदेह जताते रहना चुनाव आयोग को इरादतन कलंकित करना है। कपिल सिब्बल को देश को बताना चाहिए कि वे लंदन में ईवीएम हैकिंग कार्यक्रम में क्या कर रहे थे?
सवाल यह भी है कि जो लोग ईवीएम हैकिंग के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग के बजाय सिब्बल को ही क्यों बुलाया? सिब्बल तो ईवीएम एक्सपर्ट भी नहीं हैं। इससे तो कांग्रेस ही कटघरे में है। अगर सही में ईवीएम हैक किया जा सकता है तो, यह हैकेथॉन इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन को भारतीय चुनाव आयोग के सामने करना चाहिए था, क्योंकि चुनाव आयोग ने हमेशा कहा है कि ईवीएम हैक नहीं किया जा सकता है। इससे तो इस हैकेथॉन के आयोजन, टाइमिंग और उसके दावे पर सवाल उठना लाजिमी है। यह पूरी तरह भारतीय चुनाव प्रणाली को विश्व में बदनाम करने की साजिश प्रतीत हो रही है।
भारतीय लोकतंत्र की समूचे विश्व में प्रतिष्ठा है, सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव कराने के चलते चुनाव आयोग की साख है, विश्व के दूसरे देश चुनाव आयोग से मदद लेकर अपने यहां चुनाव करवा रहे हैं, ऐसे में वे कौन लोग हैं जो भारत की साख को ही खत्म करने पर उतारू हैं? ऐसा क्यों हो रहा है कि बार-बार हार से हताश कांग्रेस देश की प्रतिष्ठा को ही दांव पर लगा रही है? देश में करीब 20 साल से ईवीएम से चुनाव हो रहे हैं। 10 साल यूपीए की सरकार रही, मायावती, अखिलेश की सरकार बनी, ममता की दो-दो बार सरकार बनी, आप, टीआएस, टीडीपी की सरकार बनी, 2014 में कांग्रेस की सरकार ने ही लोकसभा चुनाव करवाए थे, फिर ईवीएम हैक कैसे हो गया?
अगर ईवीएम हैक हो रही है तो 2014 के बाद केरल में एलडीएफ, तमिलनाडु में जयललिता, सिक्किम में एसडीएफ, कश्मीर में हंग विधानसभा, पंजाब में कांग्रेस और अभी-अभी तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार कैसे बन गई? चुनाव आयोग को लंदन हैकेथॉन में हैक का दावा करने वाले कथित अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट सैयद शुजा के खिलाफ कठोर लीगल एक्शन लेना चाहिए। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग करना सही कदम है। ईवीएम बनाने वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक एंड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को भी इस कंपनी में शुजा के काम करने के दावे की पड़ताल करनी चाहिए।
अपनी हार के लिए कांग्रेस का ईवीएम पर दोष मढ़ना करीब 90 करोड़ मतदाता का अपमान करना है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को बनाए रखना सभी दलों का दायित्व है।
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