Call me: 9810108046

मध्य प्रदेश सरकार धर्मान्तरण के मामले वापस लेगी

पूरे राज्य में ईसाई पादरियों पर धर्मान्तरण के 300 से ज्यादा मामले दर्ज  है. कमलनाथ सरकार काे केस वापस लेते समय यह भी देखना हाेगा कि ईसाई मिशनरीज पर दर्ज धर्मांतरण के मामले वापस लेने से कहीं प्रदेश में धर्मांतरण को बढ़ावा ताे नहीं मिलेगा.

imageदलितों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के फैसले के बाद अब कमलनाथ सरकार बीजेपी राज में ईसाई पादरियों पर दर्ज धर्मान्तरण के मामले वापस लेगी. 30 जनवरी 2019 को मध्य प्रदेश सरकार के गृह विभाग के उप सचिव डाॅ आर आर भाेंसले के आदेश पर ऐसे मामलाें की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियाें की एक समिति गठित की है.

कमलनाथ सरकार में कानून मंत्री पीसी शर्मा ने इस बात के संकेत पहले ही दे दिए थे कि पिछले 15 वर्षों के दौरान बीजेपी शासन में ईसाइयों के खिलाफ दर्ज हुए राजनीतिक मामलों को वापस लिया जाएगा. दरअसल, ईसाई  नेताआें के एक प्रतिनिधिमंडल ने कानून मंत्री पीसी शर्मा से मुलाकात के दौरान मध्य प्रदेश में साल 2003 से लेकर साल 2018 तक धर्मांतरण के करीब 300 दर्ज मामले वापस लेने की मांग की थी. चर्च नेतआें का मानना है कि साल 2003 में जब से बीजेपी सरकार आई, तब से ईसाईयों पर कांग्रेस कार्यकर्ता होने का आरोप लगाकर धर्मांतरण के फर्जी मामले बनाए गए.

चर्च नेतआें ने कानून मंत्री से 3 प्रमुख मांग की है, जिसमें साल 2003 से 2018 तक सूबे में ईसाईयों पर दर्ज मुकदमों की जांच की जाए, ईसाईयों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दर्ज किए गए मामले वापस लिए जाए और झूठे मामले बनाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. मध्य प्रदेश सरकार के कानून मंत्री पीसी शर्मा की माने तो जो भी मामले बदले की भावना से दर्ज किए गए हैं, उनको वापस लिया जाएगा और ईसाई समाज के लोगों को राहत दी जाएगी.

इन में अधिकतर मामले  झाबुआ, राजगढ़, जबलपुर, मंडीदीप, इंदौर, ग्वालियर और डबरा के हैं. बाद में पूरे राज्य में ईसाई पादरियों पर धर्मान्तरण के 300 से ज्यादा मामले दर्ज  है. कमलनाथ सरकार काे केस वापस लेते समय यह भी देखना हाेगा कि ईसाई मिशनरीज पर दर्ज धर्मांतरण के मामले वापस लेने से कहीं प्रदेश में धर्मांतरण को बढ़ावा ताे नहीं मिलेगा.

Leave a Reply