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देशवासियों की भावनाओं के अनुरूप फैसले लेती सरकार

आतंकी संगठनों के विरुद्ध भारत द्वारा अतंरराष्ट्रीय मंच पर उठाए हर कदम का विरोध चीन भी लगातार करता चला आ रहा है। पाकिस्तान और चीन दोनों का लक्ष्य भारत के विकास के रास्ते बढ़ते कदमों को रोकना ही है। पाकिस्तान आर्थिक कठिनाई के दौर से गुजर रहा है, इसलिए वह भारत को आर्थिक रूप से मजबूत होते देख घबरा रहा है। चीन भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है, इसलिए भारत का विरोध कर रहा है।

unnamed जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में  केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों पर आतंकवादी हमले से देश में गम की लहर के साथ-साथ आक्रोश भी है। सीआरपीएफ के काफ़िले पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई के लिए सेना को पूरी छूट दी है। मोदी ने कहा है कि “चरमपंथी संगठन और उनके मददगारों” को “बड़ी क़ीमत” चुकानी होगी। आत्मघाती कार से हमला करने की ज़िम्मेदारी पाकिस्तानी ज़मीन से चलने वाले संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने ली है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने इस संगठन को चरमपंथी संगठन के तौर पर मान्यता दी हुई है।

 देश का हर नागरिक यही चाहता है कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को भी उसी भाषा में जवाब दिया जाए जिसे वह समझते हैं। देशवासियों की भावनाओं को समझते हुए ही प्रधानमंत्री ने जहां पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापिस लिया है, जिससे पाकिस्तान को कारोबारी फ़ायदे नहीं मिल पाएंगे। इसके अलावा भारत सरकार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है। वहीं सुरक्षा बलों को भी पूरी छूट देने की घोषणा की है तथा आतंकवादियों और उनके समर्थकों को बड़ी कीमत चुकाने की चेतावनी भी दी है।

आतंकवादियों द्वारा यह 2016 में हुए उड़ी हमले के बाद यह सबसे भीषण आतंकवादी हमला है। 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर कार बम हमला हुआ था और उसमें 41 लोग मारे गए थे। 2016 में उड़ी सैन्य अड्डे पर जैश आतंकवादियों ने हमला किया था और उसके बाद ही भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

गौरतलब है कि आतंकवादी संगठनों को पाक अधिकृत कश्मीर एक पनाहगाह के रूप में मिला हुआ है। जहां उन्हें पाकिस्तानी सेना के साथ-साथ अब चीन का भी समर्थन मिलने लगा है। आतंकी संगठनों के विरुद्ध भारत द्वारा अतंरराष्ट्रीय मंच पर उठाए हर कदम का विरोध चीन भी लगातार करता चला आ रहा है। पाकिस्तान और चीन दोनों का लक्ष्य भारत के विकास के रास्ते बढ़ते कदमों को रोकना ही है। पाकिस्तान आर्थिक कठिनाई के दौर से गुजर रहा है, इसलिए वह भारत को आर्थिक रूप से मजबूत होते देख घबरा रहा है। चीन भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है, इसलिए भारत का विरोध कर रहा है।

बीबीसी न्यूज सेवा ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि सबसे हैरान करने वाली बात है कि इस हमले को लेकर पाकिस्तान और चीन के मीडिया में लगभग ख़ामोशी है। ग्लोबल टाइम्स को चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माना जाता है लेकिन इस अख़बार में लगभग चुप्पी है। इस हमले की कोई आलोचना नहीं की गई है, ग्लोबल टाइम्स में 15 फ़रवरी को एक छोटी ख़बर छपी है जिसमें हमले की सूचना है।

चीन और पाकिस्तान की दोस्ती कोई छुपी हुई बात नहीं है। चीन, पाकिस्तान में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर काम कर रहा है। इस परियोजना के तहत चीन ने पाकिस्तान में 55 अरब डॉलर का निवेश किया है। भारत का चीन और पाकिस्तान दोनों से युद्ध हो चुका है। चीन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी कई विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

पाकिस्तान और चीन के नापाक इरादों को क्या प्रत्येक भारतीय जानता है, लेकिन इसके बावजूद जब पुलवामा जैसा दिल दहला देने वाला कांड होता है तब देश के हर नागरिक के मुंह से निकलता है खून का बदला खून से लेने का वक्त आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिन भावनाओं को प्रकट किया है उससे यह तो स्पष्ट हो रहा है कि भारत आतंकियों व आतंकियों के समर्थकों के विरुद्ध एक निर्णायक कदम उठाने की तैयारी में है।

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान जिस तरह भारत के विरुद्ध आतंकियों का इस्तेमाल कर रहा है उसको देखते हुए अब भारत को भी एक ऐसा ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान तथा उसका संरक्षण व समर्थन प्राप्त आतंकी दोबारा भारत की पावन धरती पर हिंसा फैलाने की हिम्मत न कर सकें।

भारत की आत्मा और शरीर पर जितने जख्म आतंकी कर चुके हैं उनको देखते हुए अब प्रत्येक भारतीय चाहता है कि ऐसा अब और न हो और शहीदों का बलिदान व्यर्थ न जाए।

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